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लोक चौपाल में शिशु रूप श्रीराम पर चर्चा , श्रीराम भजनों की बही सरिता ।

लखनऊ। शिशु रूप श्रीराम का दर्शन करने भगवान शंकर स्वयं वृद्ध ब्राह्मण का रूप धारण कर तथा कागभुसुंडी जी बालक रूप में शिष्य बन कर अयोध्या पहुंचे थे। भगवान की नजर उतारने के बहाने दोनों ने शिशु रूप में राम के दर्शन किए थे। ये बातें मंगलवार को इन्दिरा नगर स्थित ईश्वरधाम मन्दिर में वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी सर्वेश माथुर ने बतायीं। लोक संस्कृति शोध संस्थान द्वारा प्रभु राम की शिशु लीला पर केन्द्रित लोक चौपाल में वरिष्ठ लोक गायिकायें पद्मा गिडवानी, विमल पन्त, इन्द्रा श्रीवास्तव, रीना टण्डन के साथ ही अन्य वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किये।

कार्यक्रम का शुभारंभ विमल पंत ने हे गजवदन गौरी के नंदन से किया। नीरा मिश्रा राम से बड़ा राम का नाम, प्रो. उषा बाजपेयी ने प्रेम मुदित मन से कहो राम राम राम, अपर्णा सिंह ने राम जपो बावरे, शकुंतला श्रीवास्तव ने अवध में राम आये हैं, अर्चना गुप्ता ने श्रीराम हमारे बाल सखा, अंतरा भट्टाचार्य के निर्देशन में सौम्या गोयल, अविका गांगुली, आद्रिका मिश्रा, अथर्व श्रीवास्तव, अव्युक्ता, कर्णिका सिंह, अमेया सिंह, सुमन मिश्रा, सोनिया धर्मपाल ने सामूहिक रूप से जागिए रघुनाथ कुंवर पंछी वन बोले की प्रस्तुति दी। अमेया सिंह ने ठुमक चलत रामचंद्र गीत पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। शारदा पाण्डेय ने राघव लखन तेरे कोमल चरण, अल्पना श्रीवास्तव ने दिया निमंत्रण शबरी ने, रचना गुप्ता ने राम का नाम मुक्ति का साधन, अलका चतुर्वेदी ने राम को देखकर जनक, अरुणा उपाध्याय ने राघव ललन तोरी प्यारी सुरतिया, सुषमा प्रकाश ने राम कहो श्रीराम कहो, सुमन शर्मा ने राम का नाम मुक्ति का साधन, शिखा श्रीवास्तव ने लिए राम जी के कनिया, लक्ष्मी जोशी ने राम नाम अति सुन्दर, इन्द्रा श्रीवास्तव ने राम ही राम रटन लागी जिभिया, पल्लवी निगम ने बड़ा नीक लागे राघव जी के गउंवा, आशा सिंह रावत ने राम अइले अंगनवा, मनु राय ने जहां रामायण हो हैं राम वहां सुनाया। इसके अतिरिक्त वरिष्ठ गायिका रंजना शंकर, उषा पांडिया, शान्ति दीक्षित, कंचन सक्सेना, देवाश्री पवार, संतोष सक्सेना, गीता, सुमति मिश्रा, रुपाली श्रीवास्तव, संगीता श्रीवास्तव आदि ने भी राम भजन गाये। हारमोनियम पर जयनाथ झा, ढोलक पर शशांक शर्मा एवं दिलीप कुमार सिन्हा ने संगत की। इस अवसर पर आभा शुक्ला, अविनाश अरोड़ा, ज्योति किरन रतन, कनक वर्मा, अनुसूइया निगम, पूनम माथुर, भूषण अग्रवाल, डा. एस.के.गोपाल आदि उपस्थित रहे। लोक चौपाल की प्रभारी अर्चना गुप्ता ने सभी के प्रति आभार जताया। लोक संस्कृति शोध संस्थान की सचिव सुधा द्विवेदी ने बताया कि मई माह की चौपाल सूरदास जयंती के उपलक्ष्य में उनकी रचनाओं पर केन्द्रित होगी।

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