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वतन से मुहब्बत करना ईमान का हिस्सा है और फारुख मियां का वह हिस्सा भी क्या डगमगा चुका है ?*

सुलतानपुर। जिस तरह भारत के चुनावी माहौल में पीओके का मुद्दा बहुत ज्यादा ट्रेंड कर रहा है उस पर समाजसेवी पत्रकार डी पी गुप्ता एडवोकेट अपना नजरिया लिखते हैं कि बहुत संभव है कि नरेंद्र मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद इस पर जल्द‌ ही कोई कड़ा फैसला हो सकता है। पीओके के संदर्भ में गृहमंत्री अमित शाह का पूर्व में दिया कड़ा बयान कि पीओके के लिए हम जान भी दे सकते हैं, पाकिस्तानी सेना के दिल में ये खौफ पैदा कर रक्खा है कि मोदी सरकार कभी भी कुछ तो बड़ा एक्शन लेने को सोच रही है। पीओके को लेकर पाकिस्तानियों का इस तरह आशंकित होना एक प्रकार से गलत भी नहीं है क्योंकि सन् 2014 के बाद का नये भारत का ट्रैक रिकॉर्ड ही कुछ ऐसा रहा है कि वह कभी भी कुछ भी कर सकता है। पाकिस्तान में घुस सर्जिकल स्ट्राइक करना हो या कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाना हो इसका ज्वलंत उदाहरण हैं।

इधर बार बार ये चर्चा होना कि बहुत जल्द पीओके भारत के कब्जे में होगा इस बात से न जाने क्यों फारूख अब्दुल्ला भाई भड़क गए और खुलेआम कहने लगे कि अव्वल तो भारतीय सेना वहां जा नही पायेंगी क्योंकी पाकिस्तान फौजियों ने चूड़ियां नहीं पहन रक्खीं हैं और उसके पास एटम बम परमाणु बम है जो वह भारत पर दाग देगा। फारुख अब्दुल्ला का यह बयान हास्यास्पद है कि जिस पाकिस्तान में भुखमरी के चलते भिखमंगे भी पलायन कर रहे हैं उस पाकिस्तान से भारत को सिर्फ इसलिए डरना चाहिए क्योंकि उसके पास एटम बम है। मियां फारुख अब्दुल्ला भारत की एटमी ताकत को शायद भूल गए हैं।

विदित हो कि दशको तक भारत का नमक खाने वाले फारुख अब्दुल्ला खुद सत्ता का लाभ तो लिए ही है इसके पहले इनके वालिद शेख अब्दुल्ला और बाद में खुद इनके बेटे उमर अब्दुल्ला भी कश्मीर पर हुकूमत कर चुके हैं। अफसोस की बात है कि जो परिवार की तीन तीन पीढ़ियां दशकों तक भारत के कश्मीर में शासन सत्ता का सुख भोग चुकी है उसका एक सदस्य रह रह के दुश्मन मुल्क की बड़ाई क्यों करने लगता है। इस्लाम‌ में वतन से मोहब्बत ईमान का हिस्सा है ऐसे में वे क्या ईमान के इस हिस्से को संभाल नहीं पा रहे हैं। जो अब्दुल्ला परिवार किसी‌ पारिवारिक बिजनेस कम्पनी की तरह पीढ़ी दर पीढ़ी कश्मीर राज्य के सत्ता का फायदा लेता चला आ रहा है वह दुश्मन मुल्क पाकिस्तान का गुणगान कर भारत की जनता को क्या संदेश देना चाहता है। अब कोई उनको कुछ कहेगा तो सीधे विक्टिम कार्ड छेड़ेगें कि हमारी कौम की देशभक्ति पर संदेह क्यों किया जाता है। कोई भी देश चाहे जितना छोटा व कमजोर हो परंतु वहां की जनता कभी यह पसंद नहीं करेगी कि वहां का कोई नेता उनके आत्मविश्वास, आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने की कोशिश करे।

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